Panchmukhi

Tirth Yatra & Tours India

BABA BAIDYANATH DHAM YATRA

Gangasagar Yatra 11 Days / 10 Nights Bihar Verified Pilgrimage Tour Tour Code: #145
प्रारंभिक मूल्य (Offer Price) ₹ 19500/- / व्यक्ति (All-Inclusive)
Sacred Pilgrimage Circuit & Covered Holy Shrines (12 Places)
01 बाबा बैधनाथ धाम ज्योतिर्लिंग
02 गंगा सागर
03 मां कामाख्या देवी मंदिर
04 कोलकाता
05 दक्षिणेश्वर काली घाट
06 काली मंदिर
07 भुनेश्वर
08 कोणार्क मंदिर
09 लिंगराज
10 श्री उमा महेश्वर मंदिर (गुवाहाटी)
11 जगरनाथ पूरी
12 बाबा वासुकीनाथ
Complete Temple Darshan & Holy Bathing Arrangements All-Inclusive Tour
What's Included in This Package
Hotel Stay
One Star Verified Clean Hotels
Pure Veg Meals
Morning Tea, Breakfast, Lunch & Dinner Included
Confirmed Travel
Special Express Train / Clean Coach Transfers
Tour Escort
Dedicated Panchmukhi Yatra Coordinator 24/7
All Darshans
Temple Entry Guidance & Local Sightseeing
Elderly Care
Special assistance for senior citizens & families
सीमित सीटें उपलब्ध

इस पावन यात्रा के लिए अपनी सीट सुरक्षित करें

एसी ट्रेन/वाहन, होटल, सात्विक भोजन एवं दर्शन गाइड सहित सम्पूर्ण व्यवस्था

Sacred Darshan Highlights & Holy Significance
1

बाबा बैद्यनाथ धाम ज्योतिर्लिंग

देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम भगवान शिव के 9वें ज्योतिर्लिंग के रूप में जाना जाता है. ये एकमात्र मंदिर है जहां शिव और शक्ति दोनों एक साथ विराजमान हैं. भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम, द्वादश ज्योतिर्लिंगों में इसे 9वें ज्योतिर्लिंग के रूप में जाना जाता है. देवघर स्थित बैजनाथ धाम भगवान भोलेनाथ का एकमात्र मंदिर है. जहां शिव और शक्ति दोनों एक साथ विराजमान हैं इसलिए इसे शक्तिपीठ के नाम से भी जाना जाता है. मान्यताओं के मुताबिक बाबा बैद्यनाथ धाम में ही माता सती का हृदय कटकर गिरा था इसलिए इसे ही हृदयपीठ के रूप में भी जाना जाता है. देवघर स्थित विश्व प्रसिद्ध बैद्यनाथ मंदिर एकमात्र ऐसा मंदिर है जिसका जुड़ाव लंकापति दशानन रावण से है, रावण से जुड़ाव के कारण बैधनाथ धाम स्थित भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग को रावणेश्वर बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के नाम से जाना जाता है.

2

जगन्नाथ पुरी

पुरी का जगन्नाथ धाम चार धामों में से एक है। यहां भगवान जगन्नाथ बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विराजते हैं। हिन्दुओं की प्राचीन और पवित्र 7 नगरियों में पुरी उड़ीसा राज्य के समुद्री तट पर बसा है। जगन्नाथ मंदिर विष्णु के 8वें अवतार श्रीकृष्ण को समर्पित है।

3

गंगा सागर

जब माता गंगा भगवान शिव की जटा से निकलकर पृथ्वी पर पहुंची थीं तब वह भागीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम में जाकर सागर में मिल गई थीं। मां गंगा के पावन जल से राजा सागर के साठ हजार शापग्रस्त पुत्रों का उद्धार हुआ था। इस घटना की याद में तीर्थ गंगा सागर का नाम प्रसिद्ध हुआ।. 2) गंगासागर के समीप कपिल मुनि आश्रम बनाकर तपस्या करते थे। कपिल मुनि के भगवान विष्णु का अंश भी माना जाता है। कपिल मुनि के समय राजा सगर ने अश्वमेघ यज्ञ किया और इंद्र देव ने एक अश्व को चुराकर कपिल मुनि के आश्रम में बांध दिया। अश्वमेघ यज्ञ का अश्व चोरी हो जाने पर राजा ने अपने 60 हजार पुत्रों को उसकी खोज में लगा दिया। वे सभी खोजते-खोजते कपिल मुनि के आश्रम में जा पहुंचे और मुनि पर चोरी का आरोप लगाया। इससे क्रोधित होकर कपिल मुनि ने राजा सगर के सभी 60 हजार पुत्रों को जलाकर भस्म कर दिया। राजा सगर ने मुनि से पुत्रों के लिए क्षमा मांगी। कपिल मुनि ने कहा कि सभी पुत्रों को मोक्ष के लिए अब बस एक ही मार्ग बचा है, तुम स्वर्ग से गंगा को पृथ्वी पर लेकर आओ। राजा सगर के पोते राजकुमार अंशुमान ने प्रण लिया कि जब तक मां गंगा पृथ्वी पर नहीं आ जाती, तब तक इस वंश का कोई भी राजा चैन से नहीं बैठेगा। राजकुमार अंशुमान राजा बन गए और फिर उसके बाद राजा भागीरथ आए। राजा भागीरथ की तपस्या मां गंगा प्रसन्न हुईं और मकर संक्रांति के दिन पृथ्वी लोक पर आईं और कपिल मुनि के आश्रम पहुंचीं।

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कामाख्या देवी गुवाहाटी

असम के गुवाहाटी में नीलांचल पर्वत पर स्थित कामाख्या देवी मंदिर 51 शक्तिपीठों में से सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान शिव सती का पार्थिव शरीर लेकर तांडव कर रहे थे, तब विष्णुजी ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के टुकड़े किए। इस स्थान पर माता सती की योनि गिरी थी, जिसके कारण यहाँ मूर्ति के बजाय एक प्राकृतिक योनि-आकृति की पूजा होती है। पौराणिक कथा (सती और शिव) पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा दक्ष ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया था, जिसमें उन्होंने सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया, लेकिन अपने दामाद भगवान शिव और पुत्री सती को नहीं बुलाया। Rudraksha Ratna Rudraksha Ratna +2 सती का आत्मदाह: पिता द्वारा शिव का अपमान सहन न कर पाने के कारण सती ने यज्ञ की अग्नि में कूदकर अपने प्राण त्याग दिए। शिव का तांडव: सती की मृत्यु से दुखी और क्रोधित होकर शिव ने उनका पार्थिव शरीर कंधे पर उठा लिया और तांडव करने लगे। शक्तिपीठ की स्थापना: सृष्टि को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के 51 टुकड़े कर दिए। जहाँ-जहाँ सती के अंग गिरे, वहां शक्तिपीठ बन गए। कामाख्या का महत्व: मान्यता है कि नीलाचल पहाड़ी पर माता सती का योनि भाग गिरा था, इसलिए यहाँ देवी के इसी स्वरूप की पूजा की जाती है। मंदिर से जुड़े रहस्य और मान्यताएं अम्बुवाची मेला: यहाँ हर साल जून के महीने में अम्बुवाची मेला लगता है। माना जाता है कि इस दौरान माँ कामाख्या रजस्वला (मासिक धर्म) होती हैं। ब्रह्मपुत्र का पानी: इन तीन दिनों में मंदिर के पास बहने वाली ब्रह्मपुत्र नदी का पानी लाल हो जाता है। तंत्र साधना का केंद्र: यह स्थान तंत्र विद्या और अघोरियों के लिए दुनिया के सबसे शक्तिशाली केंद्रों में से एक माना जाता है। इन तीन दिनों के दौरान मंदिर के पट बंद रहते हैं और पुरुषों का प्रवेश वर्जित होता है। भक्तों को यहाँ प्रसाद के रूप में गीला लाल कपड़ा दिया जाता है, जिसे 'अम्बुवाची वस्त्र' कहा जाता है।

5

कोलकाता का कालीघाट काली मंदिर

कोलकाता का कालीघाट काली मंदिर हिंदू धर्म के 51 शक्तिपीठों में से एक अत्यंत पवित्र स्थल है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव द्वारा सती के पार्थिव शरीर के तांडव के समय यहाँ माता सती के दाहिने पैर का अंगूठा गिरा था। यह स्थान, जिसे माँ काली की प्रचंड शक्ति का निवास माना जाता है, भक्तों की मुरादें पूरी करने के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता के अनुसार, यहाँ का मूल मंदिर काफी छोटा था। एक कथा के अनुसार, एक भक्त (भैरव) ने भगीरथ नदी से प्रकाश की किरणें निकलती देखीं और वहां माँ काली के चरणों का पत्थर पाया। वर्तमान मंदिर: मौजूदा मंदिर का निर्माण 1847 में शुरू हुआ और 1855 तक पूरा हुआ, जो मुख्य रूप से चौरंगागिरी नामक एक संत की तपस्या से जुड़ा है। 19वीं सदी में रानी रासमणि ने भी मां काली के दर्शन के बाद यहां पूजा की थी। मां काली का स्वरूप: मंदिर में स्थापित मूर्ति अद्वितीय है, जिसमें माँ काली की तीन बड़ी आँखें, चार हाथ और एक लंबी सोने की जीभ है। यहां कुष्ठ पत्थर से निर्मित मूर्ति की पूजा होती है।

6

दक्षिणेश्वर काली मंदिर

रानी रासमणि का स्वप्न: 19वीं सदी में, रानी रासमणि, जो मां काली की अनन्य भक्त थीं, वाराणसी की यात्रा करने वाली थीं। लेकिन कहा जाता है कि यात्रा से एक रात पहले, उन्हें माता काली ने सपने में दर्शन दिए और कहा, "वाराणसी जाने की जरूरत नहीं है, मुझे गंगा के किनारे एक सुंदर मंदिर में स्थापित करो और मेरी पूजा करो"। मंदिर का निर्माण (1847-1855): स्वप्न के बाद, रानी रासमणि ने कोलकाता के पास दक्षिणेश्वर में हुगली नदी के तट पर एक जमीन खरीदी और 1847 में मंदिर का निर्माण शुरू कराया। यह मंदिर 1855 में बनकर तैयार हुआ। भवतारिणी रूप: मंदिर में माँ काली को 'भवतारिणी' (संसार से तारने वाली) के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है, जो भगवान शिव के ऊपर विराजमान हैं। रामकृष्ण परमहंस से संबंध: इस मंदिर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रामकृष्ण परमहंस से जुड़ा है। वे इस मंदिर के पुजारी थे और माना जाता है कि उन्होंने यहीं पर अपनी कठोर साधना के बाद माता काली का साक्षात्कार किया था।

7

उमानंद मंदिर

गुवाहाटी, असम के उमानंद मंदिर को "उमा महेश्वर" मंदिर के रूप में भी जाना जाता है, जो ब्रह्मपुत्र नदी के बीच मयूर द्वीप पर स्थित है। अहोम राजा गदाधर सिंह के निर्देश पर 1694 ईस्वी में निर्मित, यह शिव मंदिर भस्मकूट पहाड़ी पर स्थित है। यह भगवान शिव और पार्वती को समर्पित है, जहाँ शिव के "उमानंद" रूप (आनंद देने वाले) की पूजा होती है। मान्यता है कि भगवान शिव ने पार्वती (उमा) के साथ रहने के लिए इस स्थान को चुना था, जिसके कारण इस मंदिर को उमा-महेश्वर कहा जाता है। यह मंदिर दुनिया के सबसे छोटे बसे हुए नदी द्वीप, मयूर द्वीप (पीकॉक आइलैंड) पर स्थित है, जिसे ब्रिटिश लोग 'ब्रिटिश आइलैंड' भी कहते थे।

Boarding & Dropping Railway Stations

Devotees can board and deboard at any of the following confirmed junctions along the route:

Rajendranagar T Patna Saheb Fatuha Khusropur Bakhtiyarpur Jn Barh Mokameh Jn Hathidah Jn Barhiya Luckeesarai Jn Bansipur Mananpur Jamui Jhajha hajipurJn Chittaranjan Asansol Jn Chhapra Darbhanga Jn Barauni Jn Ara Jn Banka Jn Barsoi Jn Bhagalpur Jn Bharpura Pahleza Ghat Jn Bihar Sharif JnChhapra Jn Fatuha Jn Gaya Jn Hajipur Jn Jamalpur Jn Jogbani Katihar Jn Khagaria Jn Kiul Jn Lakhisarai Jn Manpur Jn Mansi Jn Muzaffarpur Jn Narkatiaganj Jn New Barauni Jn Patliputra Jn Patna Jn Purnia Jn Raxaul Jn Saharsa Jn Samastipur Jn Sheikhpura Sitamarhi Jn Siwan Jn Son Nagar Jn Sonpur Jn Tilaiya Jn baxur
Return journey dropping is conveniently arranged to your nearest selected junction.
Tour Itinerary Overview & Instructions
Boarding: Will Be Nearest Railway Junction.
Dropping: To Your Nearest Railway Junction.
CALL FOR MORE INFORMATION - 7440201045//7440201048
Booking, Cancellation & Refund Policies
Booking Terms

To Confirm Your Journey, It Is Mandatory To Book 20% Of The Amount Online On Www.panchmukhiyatra.com.  The Remaining 80% Amount Will Have To Be Paid Online At Www.panchmukhiyatra.com 30 Days Before The Journey.  It Will Be Mandatory To Make 100% Payment Before 30 Days.

Cancellation Policy

If You Cancel Your Trip For Any Reason, Then 20% Of The Full Amount Of The Trip Will Be Charged As Cancellation / Cancellation Charge, 50% Amount Will Not Be Refundable If The Trip Is Canceled / Canceled Before 15 Days Of The Date Of Travel.  And 75% Will Not Be Refundable If The Trip Is Canceled Before 7 Days.  And 100% Amount Will Not Be Refundable If The Trip Is Canceled Before 2 Days Of The Date Of Travel.

Refund Policy

Any Refund Will Be Done Within A Week.

100% Verified Pilgrimage

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सुगम एवं सुरक्षित दर्शन यात्रा - पंचमुखी तीर्थ यात्रा परिवार के साथ

Bihar Special Tour

BABA BAIDYANATH DHAM YATRA

Duration 11D / 10N
Tour Type Devotee Group
Special Offer Tour Fare All-Inclusive
Sleeper
₹ 19500
Per Devotee
3Ac
₹ 31500
Per Devotee
2Ac
₹ 39500
Per Devotee
Includes Train Fare, Veg Food, Hotel & Transfers
Upcoming Departure Dates (Select Date)
30 September To 09 October 2026 Available
25 Nov To 04 December 2026 Available
17 February To 28 February 2027 Available
01 April To 12 April 2027 Available
16 Sep To 27 September 2027 Available
Share Tour With Family:
100% Pure Veg Meals
Verified Safe Hotels
Dedicated Tour Guide
Govt. Registered Agency
Need Help Planning?
Have special requirements for elderly pilgrims, or need customized boarding stations? Speak directly with our head yatra coordinators.
+91 7440201045 +91 7070999026
Why Pilgrims Trust Panchmukhi Yatra?
  • 15+ years of spiritual yatra experience
  • Over 50,000+ satisfied devotees served
  • Special care and priority for elderly citizens
  • Transparent pricing with 0 hidden charges
Starting From ₹ 19500/-
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